Sunday, January 18, 2026

अटक्यो


कृष्णराज जी,

मेरो मन श्री गिरधर जी में अटक्यो ।

जाकी छवि देखत ही,

मेरो नैनन में बस गयो ॥

मोर मुकुट सिर सोहत है,

कुंडल झलमल कानन में ।

पीतांबर लहरातो है,

मन मोह्यो वृन्दावन में ॥

मुरली मधुर बजावत है,

सुर ताल सबै मन भावे ।

सुनत ही मीरा बावरी,

घर आँगन सब बिसरावे ॥

रैन दिना बस ध्यान धरूँ,

और न कछु सुख जाणूँ ।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर,

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