Monday, September 28, 2026

SEVA SERIES — ORIGINAL 5

 

संग-संग बैठीं सिया — कुछ ना कहलीं राम

Sang-Sang Baithin Siya — Kuchh Na Kahlin Ram

Seva is not always doing something for someone. Sometimes the greatest seva is simply giving someone your presence. Sita and Rama sitting together, watching the evening, talking a little—or saying nothing at all.

मुखड़ा

संग-संग बैठीं सिया-राम,

कुछ ना कहलीं, मन बतियावे।

चुपके-चुपके साँझ उतरले,

प्रेम दीपिया जरि जावे।

संग-संग बैठीं सिया-राम,

मनवा मनवा से बतियावे।

१. संझा की बेला

दिन भर के काम निबटि गइल,

थकले रघुराई।

सिया आके पासे बइठलीं,

मंद-मंद मुसुकाई।

ना कोई बात, ना कोई जल्दी,

ना दुनिया के भार।

बस दू गो मन साथे बइठल,

ओही में सुख अपार।

२. नदी किनारे

नदी किनारे दू गो बइठल,

पानी धीरे बहे।

सिया निहारे राम के मुखड़ा,

राम सिया के नेह।

पंछी बोले, पवनवा डोले,

चंदा झाँके पार।

कुछ ना माँगे, कुछ ना चाहे,

साथ रहे बस प्यार।

३. वन की रात

तारा गिने सिया मुसकाईं,

राम गगन निहारे।

“कितना सुंदर रात भइल बा,”

सिया धीरे से पुकारे।

राम हँसि बोले — “सिया, तुम संग

हर दिन लागे त्यौहार।”

कुटिया छोटी, आकाश बड़ा,

प्रेम भइल संसार।

४. सबसे सरल सेवा

सेवा केवल फूल चढ़ाना,

सेवा केवल भोजन ना।

अपने मन के समय दे देना,

ई भी पूजा कम ना।

पास बइठना, साथ निभाना,

चुप रह के मुसकाना।

राम के संग जो घड़ी बितावे,

सिया के वही खजाना।

अंतिम मुखड़ा

संग-संग बैठीं सिया-राम,

कुछ ना कहलीं, मन बतियावे।

चुपके-चुपके साँझ उतरले,

प्रेम दीपिया जरि जावे।

जहाँ न शब्द, न कोई माँग,

केवल साथ सुहावन।

सिया-राम के प्रेम में देखीं,

मौन भी बनल भजन। 

Seva is not only what we do for someone.

Sometimes seva is simply being there.

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