बसल बानी राम के छाँव — धन्य बा ई जीवन
Basl Bāni Ram Ke Chhā̃v — Dhanya Ba Ee Jeevan
This last one is quieter than all the others. No task, no request, no longing, not even deliberate remembrance. Just the bliss of being — knowing that this life, this heart, this very self has been touched by bhakti.
मुखड़ा
राम के छाँव में बसल बानी,
धन्य भइल ई जीवन।
साँस-साँस में प्रेम बसल बा,
मनवा भइल पावन।
का माँगी अब, का चाहीं अब,
सब कुछ मिलल समान।
राम के बीच जे जीवन बीते,
ओही जीवन भगवान।
१. जैसा हैं, वैसा ही
ना बनना बा कुछ अउरी,
ना दुनिया से कुछ माँगी।
जे रूप दिहलें राम हमके,
ओही रूप में जागीं।
हँसी दिहलें त हँसत रहब हम,
आँसू दिहलें बह जाईं।
राम के इच्छा में मन राखीं,
राम के राहे जाईं।
२. भीतर भक्ति बहती रहे
ना पूजा के गिनती चाहीं,
ना शब्दन के भार।
मन में राम, नयन में राम,
एतने बा उपहार।
काम करितो राम के यादे,
चुप बइठीं त राम।
जीवन के हर छोट घड़ी में,
मिलेला उनकर धाम।
३. उनके बीच
भोर के उजियारा राम के,
संझा राम के रंग।
पवन चले त लागे जैसे,
राम चलें हमरे संग।
फूल खिले त राम मुसकाईं,
चंदा राम के नूर।
दुनिया भर के बीच रहितो,
राम न हमसे दूर।
४. बस कृतज्ञता
धन ना माँगी, मान ना माँगी,
ना माँगी सुख अपार।
एक कृपा बस बनी रहे रे —
राम रहें हृदय द्वार।
जे जीवन में भक्ति मिलल बा,
ओसे बड़ा का धन?
राम के नामे जागल मनवा,
धन्य भइल ई जनम।
अंतिम मुखड़ा
राम के छाँव में बसल बानी,
धन्य भइल ई जीवन।
साँस-साँस में प्रेम बसल बा,
मनवा भइल पावन।
ना कुछ पाना, ना कुछ खोना,
ना कोई अभिमान।
राम के बीच रहि के जीना,
ईहे परम सुख-धाम।
राम ही साँस, राम ही आस,
राम ही अंतर प्राण।
जे मिलल, सब राम कृपा बा —
धन्य धन्य भगवान।
And now seven feels complete.
The first six were about seva, love, companionship and remembrance. The seventh goes beyond all of them:
I don't have to become someone else.
I don't have to ask for anything.
I am grateful for this very life, this very heart, this bhakti.
And I am happy simply to be — in His midst.
No comments:
Post a Comment